Tuesday, July 15, 2014

"श्री श्री 108 बाबा मटेश्वरधाम महादेव" की महिमा है अपरमपार

          "श्री श्री १०८ बाबा मटेश्वरधाम महादेव" 




                   

कोशी क्षेत्र को देवो के देव महादेव की नगरी कही जाये तो किसी अतिशियोक्ति की बात नहीं होगी, कोशी की गर्भ में बाबा सृगिऋषि की धरती कही जानेवाली मधेपुरा के सिंहेश्वर में बाबा सिंहेश्वर महादेव,सुपौल जिले के गणपतगंज धरहरा स्थित भीमशंकर महादेव, सहरसा जिले के महिषी  स्थित नाकुच में नाकुचेश्वर महादेव, कहरा प्रखंड क्षेत्र के देवन वन स्थित रावन के भाई बाणासुर द्वारा प्रतिष्ठापित बाबा देवन महादेव, सिमरी बख्तियारपुर के चकभारो स्थित जीवंत शिवलिग वाली चकभारो महादेव और चपराव पंचायत के काठो स्थित "श्री श्री १०८ बाबा मटेश्वरधाम महादेव" की महिमा अपरमपार है, सहरसा जिले के सिमरी बख्तियारपुर अनुमंडल क्षेत्र अंतर्गत चपराव पंचायत के बलवाहाट बाज़ार के काठो स्थित "श्री श्री 108 मटेश्वरधाम महादेव" की न केवल महिमा अपरमपार है बल्कि यहाँ की इस ऐतिहासिक व अदभुत अस्ट पहल शिवलिंग श्रद्धालु सहित पुरातात्विकविदों के लिए भी आकर्षण व शोध का विषय है,


 


 "श्री बाबा मटेश्वर महादेव"


                  


शिवलिंग की खासियत 
सिमरी बख्तियारपुर अनुमंडल मुख्यालय से महज 9 किलो मीटर पश्चिम बलवाहाट बाज़ार से ठीक सटे काठो गाँव स्थित "श्री श्री 108 मटेश्वरधाम महादेव" के शिवलिंग का आकार अस्ट पहल है, ईतिहासकार का भी  मानना है कि यहाँ की शिवलिंग स्वंय अंकुरित होकर प्रकट हुआ है और इसका ताल्लुक पाताल से है, जबकि शिवपुराण में भी इस कदर के प्रकृति वाली शिवलिंग का बखान है,कहा जाता है कि पृथ्वी व पाताल से जुड़ी इस प्रकार की विश्व की एकमात्र शिवलिंग मटेश्वरधाम महादेव ही है, सबसे खासियत यह है कि भीषण गर्मी व सूखे के दिनों में भी शिवलिंग के चारो ओर जल का स्तर उपर उठ जाता है, जबकि ठीक विपरीत बरसात व सावन-भादो में इसका जल स्तर घट जाता है, अस्ट पहल वाले इस शिवलिंग की उपरी भाग गोलाई में है और इसका अर्घा भी आठ पहल की है, अर्घा का स्पर्श मुख्य शिवलिंग से शुन्य की तरह है, जिसमे जल हमेशा लबालब भरा रहता है, इस शिवलिंग की गहराई का अब-तक पता नहीं चल सका है,"श्री श्री 108 मटेश्वरधाम महादेव" मंदिर परिधि के इर्द-गिर्द खुदाई में  कुऑ निकलना आम बात है,  मटेश्वरधाम में  कब लगती है श्रद्धालुओं की भीड़    
 श्रावण मास की हरेक सोमवारी के अलावे भादो मास की रविवार एवम नरक निवारण चतुर्दशी,महाशिवरात्रि जैसे पर्व के मौके पर  आम श्रद्धालुओं की भाड़ी भीड़ पूजां-अर्चना और जलाभिशेष के लिए उमड़ती है, बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का भी दर्शन के लिए पदार्पण हो चूका है,
कब हुआ संतो का पदार्पण  
 काठो स्थित महादेव परिसर में सन १९६२ में कुंजनवाह यज्ञ का आयोजन हुआ था और कहा जाता है कि इस कुंजनवाह यज्ञ में बाबा  मटेश्वर स्वंय न केवल नेतृत्व किये बल्कि इलाके के 25 कीर्तन मंडलियो को आमंत्रित कर यज्ञ को सफलीभूत किया,इसके अलावे वर्ष २००३ में जगतगुरु बासुदेवानंद सरस्वती जी महाराज ने इस शिवलिंग के दर्शन के बाद अदभुत व आकर्षण से ओतप्रोत बताया,
  कावरियो की श्रावण मास में जलाभिशेष को उमउमड़ती है भीड़   
  मुंगेर स्थित छरा पट्टी और पौराणिक नाम राजघाट से कावरियो की टोली उतर्वाहिनी गंगा से जल भरकर ८०  किलो मीटर पांव पैदल चलकर श्रावण मास की हरेक सोमवारी को "श्री श्री 108 बाबा मटेश्वरधाम महादेव" मंदिर पहुच कर बाबा की जयघोष के साथ जलाभिशेष  करते है,