Monday, August 14, 2017

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का १६ अगस्त को दौरा करेगी रालोसपा टीम:चन्दन बागची


बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का 16 अगस्त को दौरा करेगी रालोसपा टीम:चन्दन बागची 
सहरसा: बाढ़ से तबाह हो रहे आम जन-जीवन को सुविधा मुहैया कराने के लिए रालोसपा ने जिला प्रशासन से मांग किया है।  जिला रालोसपा के अध्यक्ष चंदन कुमार बागची, प्रदेश युवा लोक समता के महासचिव शशांक सुमन विक्की, प्रधान महासचिव गौरव सिंह ने संयुक्त रूप से जारी बयान में कहा है कि जिले के प्रखंड महिषी के 11 पंचायत, नवहट्टा के 7 एवं सिमरी बख्तियासरपुर व सलखुआ के दर्जनों पंचायत भीषण बाढ़ की चपेट में आ चुकी है। इसके बावजूद प्रभावित पंचायत के गांवों में बाढ़ राहत, नाव, चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं करायी जा सकी है। प्रदेश युवा लोक समता के महासचिव शशांक सुमन विक्की ने कहा है बाढ़ के कारण व्यापक पैमाने पर किसानों के फसलों की भी क्षति हुई है। किसानों के हित को देखते हुए बर्बाद फसलों के मुआवजा देने की दिशा में भी संबंधित विभागों को निर्देश दिए जाने का अनुरोध किया है। श्री विक्की ने कहा कि अब सूबे में राजग की सरकार है इस वजह से भी अपेक्षा बढ़ गयी है। इसके साथ ही सबसे खुशी की बात यह है कि आपदा मंत्री सिमरी बख्तियारपुर के विधायक दिनेश चंद्र यादव हैं और वे कोशी व कोशी वासियों की कष्ट को करीब से जानते हैं। रालोसपा की टीम 16 अगस्त को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर समस्याओं को सरकार तक पहुंचाएगी। बिहार सरकार के अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री श्री रमेश ऋषिदेव से मुलाकात कर बधाई भी दिया और बाढ़ प्रभावितों की सुधि लेने का भी अनुरोध किया ।

जश्न-ए-आजादी में अपनी परफॉरमेंस से दर्शकों को राज महाजन ने झूमने को किया मजबूर

गणतंत्र दिवस के कार्यक्रम में गाना गाकर कुछ यूं आज़ादी का जश्न मनाया राज महाजन ने
मेघा वर्मा/दिल्ली: दिल्ली के प्रसिद्द डॉलीवुड टैलेंट क्लब में भामाशाह कुटुंब और मोक्ष म्यूजिक कंपनी द्वारा 13 अगस्त को  जश्न-ए-आजादी प्रोग्राम का आयोजन किया गया। जिसमें माहौर वैश्य भामाशाह समाज के कई आर्टिस्टों ने भाग लिया। इस प्रोग्राम में राज महाजन भी गाते हुए नज़र आये। राज ने और इस दिल में क्या रखा है’ और तुझको पुकारे मेरा प्यार’ गाकर दर्शकों का दिल जीत लिया कार्यक्रम के अंत में महाजन ने देशभक्ति गीत यह देश है वीर जवानो का’ गाकर सबको झूमने पर मजबूर कर दिया और इस तरह आज़ादी का जश्न मनाया गया। आयोजकों में देवेन्द्र गुप्तामनोज गुप्ता और संजय गुप्ता ने भामाशाह समाज के कलाकारों को पुरस्कार दिया और राज महाजन को भी सम्मानित किया। आप जानते ही होंगे कि बिग-बॉस 11 को लेकर राज महाजन के नाम की अटकलें जोर-शोर से चल रही है। साथ ही हॉट निया शर्मायूट्यूब सेंसेशन धिन्चक पूजादेवोलीनाडांसर सपना चौधरीभाभी जी घर पे हैं की शिल्पा शिंदेगुरमीत राम रहीम के नाम भी लिस्ट में हैं





Saturday, August 12, 2017

हिमालयी बारिश व सप्तकोशी की धारा से नेपाल हुआ जलमग्न


 सप्तकोशी की धारा व हिमालयी बारिश से नेपाल हुआ जलमग्न 
 पूर्वी कोशी व पश्चिमी तटबंध के अन्दर सुपौल एवं सहरसा जिले के निर्वासित गांवों की स्थिति भी बाढ़ से बनी भयावह...
 सहरसा: नेपाल के तराई क्षेत्र सहित पूर्वी व पश्चमी कोशी तटबंध के अंदर निर्वासित गांवों की हालत बारिश को लेकर तबाही का रुख अख्तियार कर लिया है। नेपाल तराई क्षेत्र के प्रमुख शहरों में बिराटनगर, इटहरी, बिरतामोड़, भद्रपुर, इोरवावा, राजविराज, जनकपुर, जलेश्वर, वीरगंज, भैरावावा, नेपालगंज आदि जलमग्न है। इसके साथ ही नेपाल का एयरपोर्ट भी जलमग्न है और उड़ान अवरुद्ध रहा। भारतीय व् नेपाल सीमा क्षेत्र का जोगबनी भी जलमग्न हो गया है। जोगबनी रेल ट्रेक भी जलमग्न है। इस वजह से सिर्फ बथनाहा तक ही ट्रेन चली। भारतीय क्षेत्र के बिहार अवस्थित पूर्वी कोशी व पश्चिमी तटबंध के अन्दर सुपौल एवं सहरसा जिले के निर्वासित गांवों की स्थिति भी बाढ़ से भयावह बनी हुई है।

इस साल सप्तकोशी नदी नेपाल को भी न केवल बाढ़ से तबाह किया बल्कि जनजीवन को भी तबाह कर दिया है। नेपाल को परेशां होते देख

शनिवार को 10 बजे दिन में कोशी बराज से 2 लाख 81 हजार 955 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया वहीं बराह क्षेत्र में भी एक लाख 99 हजार 500 क्यूसेक डिस्चार्ज किया गया और जल वृद्धि भी जारी है। भीमनगर कोशी बराज से लेकर मरौना, सरायगढ़, नवहट्टा, महिषी से राजनपुर व वीरगांव आदि के सैकड़ों गांव बाढ़ की चपेट में आ गयी है। जबकि नेपाल के सुनसरी, मोरंग के भी शहर व गांवों की हालत भयावह हो गयी है। सुनसरी के औरबनी विकास समिति निवासी गुणानंद चौधरी ने बताया कि एक हप्ताह से बारिश हो रही है। चार दिनों की बारिश की वजह से सुनसरी-मोरंग का इलाका जलमग्न हो गया है। बिराटनगर का एयरपोर्ट भी जलमग्न है। बिराटनगर-धरान का कोशी राजमार्ग भी डूब गया है। 
अररिया का बहादुरगंज रोड 
भीम नगरवासी भी दहशत में हैं। सूत्रों ने बताया कि भीमनगर कोशी बराज का भी 56 फाटक में से 40 फाटक को पानी के भीषण दवाब को लेकर खोल दिया गया है। अब लग रहा है कि नेपाल स्थित मध्य हिमालय में भी खूब बारिश हो रही है। 
सीमांचल के अररिया-बहादुरगंज राष्ट्रीय उंच्च पथ 327 ई सड़क पर चरघरिया के पास कनकई नदी के बाढ का पानी के ओवरफ्लो होने से आवागमन प्रभावित रही और पूर्वोत्तर, पश्चिम बंगाल एवं किशनगंज से सड़क टूटा रहा । 
1987 के भीषण बाढ से भी अधिक खराब स्थिति इस बार कनकई नदी ने पैदा कर दी। स्थानीय लोगों को जग कर रात बिताना मजबुरी हो गया। सैंकडों घरों में बाढ़ का पानी घुस जाने से जनजीवन प्रभावित हो गया। यूँ कहा जा सकता है कि कोशी व महानंदा क्षेत्र बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुई है साथ ही गंगा का जल स्तर बढ़े होने की वजह से कुर्सेला भी कोशी की पानी को मुश्किल से ग्रहण कर पा रही है। बारिश का आलम यही रहा तो बाढ़ नदी के अंदर और बाहर भी तबाही मचा सकती है...

Thursday, August 10, 2017

KOSHI DHINDHORA: वाराणसी में जन सरोकार साहित्यिक मंच ने आयोजित की व...

KOSHI DHINDHORA: वाराणसी में जन सरोकार साहित्यिक मंच ने आयोजित की व...: जन सरोकार साहित्यिक मंच ने आयोजित की विचार गोष्ठी प्रकाश राय/वाराणसी। शुक्रवार 28 जुलाई 2017 की संध्या चार बजे वाराणसी अवस्थित ...

वाराणसी में जन सरोकार साहित्यिक मंच ने आयोजित की विचार गोष्ठी

जन सरोकार साहित्यिक मंच ने आयोजित की विचार गोष्ठी



प्रकाश राय/वाराणसी। शुक्रवार 28 जुलाई 2017 की संध्या चार बजे वाराणसी अवस्थित लंका पर सेतु प्रकाशिनी एवं जन सरोकार साहित्यिक मंच के द्वारा सीमा आजाद और उनके हमसफर विश्व विजय की जिंदानामा शीर्षक जेल डायरी का लोकार्पण किया। इसके बाद फासीवाद के दौर में अभिव्यक्ति की आजादी पर हमले, प्रतिरोध विषयक विचार गोष्ठी का भी आयोजन किया गया। पुस्तक लोकार्पण के बाद सीमा आजाद और विश्व विजय ने अपने-अपने जेल जीवन के अनुभव सुनाए और अंत मे दोनों ने डायरी के कुछ मार्मिक अंशों को गोष्ठी के पटल पर रखा। गोष्ठी में जेल डायरी पर तीस्ता शीतलवाड़ व प्रो. शाहिना रिजवी ने विस्तार से अपनी बातों का रखा। गोष्ठी के विषय पर प्रो.प्रमोद कुमार वागड़े एवं मेरा भाषण हुआ विचार-गोष्ठी बहुत ही विचारोत्तेजक रही। छात्र-छात्राओं की बड़ी संख्या के अलावा नगर के बुद्धजीवी,साहित्यकार,लेखक,सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा बीएचयू के कई प्रोफेसर उपस्थित थे। जिनमें प्रो. बलिराज पांडेय, प्रो.चन्द्रकला त्रिपाठी, वाचस्पति, मुनीजा खान, मूलचन्द सोनकर,श्रीप्रकाश राय, सुनील यादव, कुसुम वर्मा आदि प्रमुख रूप से शामिल थे। विचार गोष्ठी की सफलता के लिए जन सरोकार साहित्यिक मंच के साथियों को लोगों ने बधाई भी दिया। 

सरकार और एनजीओ का दुधारू गाय बनकर रह गयी है कोशी की कुसहा पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण कार्य

सरकार और एनजीओ का दुधारू गाय बनकर रह गयी है कोशी की कुसहा पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण कार्य 

तीसरे चरण 2021 तक खर्च होंगे 375 मिलियन डॉलर   
संजय सोनी/राजीव झा, सहरसा: प्रकृति से परिवार तक की रंगत बदलने वाली कोसी की कुसहा त्रासदी के 18 अगस्त 2017 को नवमीं बरसी है। इस त्रासदी में फसलों से लहलहाने वाली खेतों में जहां बालू से चांदी पिट गयी वहीं हंसता-खेलता परिवार न केवल उजड़ गया बल्कि कल तक खुद को राजा समझने वाले परिवारों की स्थिति भिखमंगे से भी दयनीय हो गयी। लेकिन सरकार का भरोसा पहले से कोसी बेहतर बनाएंगे की परिकल्पना एवं पुनर्स्थापन कार्य का लक्ष्य निर्धारित समय-सीमा तो छोड़िये 2017 में भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। हां, कुसहा त्रासदी के दौरान से लेकर अब तक एनजीओ की स्थिति वही रही पर, उसके सचिव की आर्थिक स्थिति जरूर बदल गयी। संगठन की स्थिति भी वही है पर, संगठन के मुखिया की स्थिति बदल गयी। कहने का मतलब कुसहा बाढ से प्रभावित परिवारों के नाम पर फंड लेने वाले और कई राजनीतिक व सामाजिक संगठनों के प्रमुखों का चेहरा जरूर बदल गया। यही कुसहा पीड़ितों की सेवा करने वालों की करवी सच्चाई है।
अब तक नहीं हुआ रोजगार का कोई सृजन
कोसी के ईलाकों में आज भी रोजगार का कोई सृजन नहीं हो पायी। पलायन की रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रहा। शिक्षा व चिकित्सा ढोंग साबित हो रही है। बाढ के दौरान बच्चे शिक्षा से वंचित हो जा रहे हैं। त्रासदी के शिकार गांव वासियों के ललाट पर आज भी तनाव की लकीर दिखती है। विकास की तथाकथित यात्रा सिर्फ सड़कों से लेकर बाढ आश्रय स्थल तक ही रह गयी। पुल-पुलियों के निर्माण से हद तक आवागमन के साधन सुलभ अवश्य हुए हैं। पर, बाढ से निजात के लिए सड़कों के निर्माण में भी जल निकासी की सोच को विकसित नहीं किया गया। लिहाजा तटबंध के अंदर सड़कों की जाल तो बिनी गयी, लेकिन बाढ सब कुछ बेपर्द कर दे रही है और यहां की ज्वलंत समस्याएं बाढ, कटाव, विस्थापन, पलायन, बच्चों का कुपोषण, बाल विवाह, शादी के नाम पर बालिकाओं के साथ अत्याचार जैसे कोशी की प्रमुख समस्या आज भी ज्वलंत ही बनी हुई है।
कुसहा त्रासदी के खौफ़नाक आंकड़े
कोसी नदी में आयी कुसहा की आफत बाढ़ से सूबे के 15 जिलों को बुरी तरह अपने आगोश में कर लिया गया था। जिसमें करीब 25 लाख से अधिक की आबादी प्रभावित हुआ। लेकिन कोसी व सीमांचल के चार जिलों में सुपौल, सहरसा, मधेपुरा व अररिया में बाढ़ की स्थिति बेहद गंभीर बनी। इस त्रासदी में बिहार के 15 जिलों के 412 पंचायतों के 993 गांव चपेट में थी। बाढ पीड़ितों के लिए सरकार की तरफ 362 राहत शिविर की जो व्यवस्था की गयी थी उसमें 4 लाख 40 हजार बाढ पीड़ितों ने शरण लिया। इस महाजलप्रलय में अमीरों व गरीबों के 2 लाख 36 हजार 532 घर ध्वस्त हुए। जहां 18 सौ किलो मीटर सड़क क्षतिग्रस्त हुए वहीं 11 सौ पुल, पुलिया व कलवर्ट टूट गये। फसलों का जब आंकड़ा निकाला गया तो उसमें भी धान की फसल 38 हजार एकड़, 15 हजार 500 एकड़ में मक्का व 6 हजार 950 एकड़क में अन्य फसलों के बर्बादी की बातें सामने आयी। जबकि दुधारू पशु 10 हजार, 3 हजार अन्य पशुओं के आलावा 25 सौ छोटे जानवरों की अकाल मौतें हुई। मानव क्षति में 362 लोग काल के गाल में समा गये और 35 सौ लोग लापाता दर्ज किये गये थे।
तीसरे चरण 2021 तक खर्च होंगे 375 मिलियन डॉलर   
केवल कोशी प्रमंडल के सुपौल, सहरसा व मधेपुरा जिले के प्रखंडों में हुई क्षति को अगर आंकड़ों में याद किया जाय तो सहरसा के 5, सुपौल के 5 व मधेपुरा जिले के 11 प्रखंडों में पुनर्वास करने का रखा है। इसके तहत पहले चरण में एक लाख मकान का निर्माण व क्षतिग्रस्त सड़कों और पुल-पुलियों का निर्माण सहित बाढ़ प्रबंधन का काम किया जाना है। खेतों से बालू हटाया जाना है और आजीविका के साधनों का विकास किया जाना है। जबकि पहले चरण के तहत 259 मिलियन डॉलर खर्च किया जाना था। पहले इसकी समय सीमा सितंबर 2014 रखी गयी थी और कार्य के मौजूदा रफ्तार को देखते हुए समय सीमा बढ़ाकर 2016 कर दी गयी। दूसरे चरण में 2019 तक 375 मिलियन डॉलर और तीसरे चरण में 2021 तक 375 मिलियन डॉलर खर्च किया जाना है। इतना ही नहीं कोशी आपदा से प्रभावित मधेपुरा, सुपौल व सहरसा जिले के अंतर्गत आपातकालीन कोसी बाढ पुनर्वास परियोजना के अंतर्गत बिहार आपदा पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण सोसाईटी के राषि अधियाचना के आलोक में पथ, पुल-पुलिया व मकानों के निर्माण तथा अन्य संबंधी योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए वित्तीय वर्ष 2014-15 में कुल 4 अरब 80 करोड़ 36 लाख रूपये के अनुदान राशि का आवंटन योजना एवं विकास विभाग बिहार सरकार के द्वारा किया गया था।
आंकड़ों में कोशी बेसिन परियोजना के कार्य
बिहार आपदा पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण सोसाइटी के द्वारा कोसी बाढ़ समुत्थान परियोजना के तहत 62 हजांर 644 के विरूद्ध संशोधित लक्ष्य से करीब 55 हजार 914 घरों जो प्रतिशत में 89 प्रतिषत घरों के निर्माण कार्य को पूरा करने का दावा कर रही है। जबकि शौचालय निर्माण में देरी से शुरुआत होनें के कारण अब तक करीब 34 हजार 521 शौचालयों का निर्माण पूरा कर लिया गया है जिसका प्रतिशत में 58 प्रतिशत को पूर्ण बताया जा रहा है। इसके साथ ही सभी 69 पुलों को निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। इसी तरह परियोजना के तहत 259.16 किमी की सड़कों के भी निर्माण कार्य को पूरी तरह से पूरा किये जाने का दावा किया जा रहा है और केवल 3 पैकेजों में शेष छोटे कार्य शेष रह गये हैं। कोसी नदी में बाढ़ की सुरक्षा पूरी तरह कार्यान्वित होने की बातें कही जा रही है और वर्तमान कार्य योजना के मुताबिक काम मई 2018 तक पूरा होने की उम्मीद है। जबकि 30 जून 2018 तक सभी कार्यों को पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित है। इतना ही नहीं जल संसाधन विभाग की कुल 18 योजनाओं में से 10 योजनाओं को पूर्ण किया जा चुका है। बिहार आपदा पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण सोसाइटी के बारे में कही जा रही है कि इन कामों को पूरी निष्ठा से कर रही है। यही वजह है कि बिहार कोशी बाढ़ समुत्थान परियोजना के सफल क्रियान्वयन से प्रेरित होकर विश्व बैंक के साथ बिहार कोसी बेसिन विकास परियोजना का इकरारनामा हुआ और मार्च 2016 से विधिवत कार्य प्रारंभ है।








Saturday, July 29, 2017

आखिर कौन करेगा गौशाला का जीर्णोद्धार





अध्यक्ष व सचिव के समक्ष सार्वजनिक संपत्ति को बचाने की चुनौती  
एसडीओ,शौरभ जोरवाल   
सचिव,शालिग्राम देव 
राजीव झा/सहरसा: कई दशकों के बाद बनगांव गौशाला के जीर्णोद्धार की उम्मीद जगी है। ऐसा पहला मौका है जब गौशाला के पदेन अध्यक्ष के पद पर भारतीय प्रशासनिक सेवा के ईमानदार, कर्तव्यनिष्ठ व कर्मठ सदर अनुमंडल पदाधिकारी के रूप में सौरभ जोरवाल हैं तो सचिव के पद पर भाजपा के अनुभवी व पूर्व जिला अध्यक्ष शालिग्राम देव। इतना तो सच है कि अब तक बनगांव गौशाला के सचिव पद पर जो भी रहे हों उनमें एक के कार्यकाल को छोड़कर सबों ने गौशाला का गर विकास नही चाहा तो बर्बादी भी नही चाहा। खैर, इनमें जिन पूर्व सचिवों की बात करेंगे सब के सब स्वर्गीय हो गए हैं। अभी हाल ही में 29 मार्च 2017 को सचिव नरोत्तम तिवारी का निधन हुआ है। अब 23 जुलाई को शालिग्राम देव को सचिव मनोनयन किया गया है।
गौशाला की कब हुई थी स्थापना: वर्ष 1921 में बनगांव गौशाला की स्थापना हुई थी। बनगांव गौशाला बरियाही बाजार के सचिव जैसे पद को 70 के दशक तक शहर के प्रमुख व्यवसायी व समाजसेवी शरीखे लोगों में स्व. मनीलाल तुलस्यिान के बाद क्रमवार रूप से स्व. रामदेव साह, स्व. सत्यनारायण प्रसाद गुप्ता, स्व. नरोत्तम तिवारी आसीन रहे और सुशोभित करते हुए सफल संचालन भी किया। लेकिन दुर्भाग्य यह रहा कि कभी किसी ने गौशाला का विकास नही किया तो लूटा भी नहीं।
अध्यक्ष व सचिव के समक्ष चुनौती: अब वर्तमान अध्यक्ष व सचिव के समक्ष गौशाला के सफल संचालन की सबसे बड़ी चुनौती है तो करोड़ों की संपत्ति को भूमाफियाओं से अतिक्रमण मुक्त कराना उससे बड़ी चुनौती सामने है। 
सार्वजनिक संपत्ति पर 25 लोगों का कब्ज़ा: इस सार्वजनिक संपत्ति पर कथित भाड़ेदारों की नजर ऐसी है कि 50 रुपये से 200 तक का ही बड़े-बड़े कमरों का किराया होने पर भी समय पर कभी भुगतान नही किया गया है। इस वजह से शहर के चांदनी चौक स्थित गौशाला के 25 किरायेदारों पर 3 लाख 39 हजार 106 रुपया बांकी है। जिसकी वसूली के साथ-साथ उन मकानों व परिसर को मुक्त करवाना भी जटिल कार्य है। बताया जाता है कि बरियाही बाजार स्थित गौशाला के पास 12 बीघा 13 कट्ठा जमीन है। जिसमे सुधा डेयरी के दूध शीतलीकरण के लिए करीब दो बीघा दिया गया है और शेष जमीन बटिया पर 3 हजार रूपये सालाना पर दिया हुआ है। आपको जानकर ताज्जुब होगा कि इतने बड़े गौशाला में शहर व बरियाही लेकर महज पांच गायें ही है। दो कर्मचारी। मतलब साफ है कि अब गौशाला लुटेरी टकसाल बनी रही और आने वाले नोट छापते रहे। अब देखना यह है कि इस टकसाल पर पाबंदी लग पाती है या नही या फिर अवैध किरायेदारों समेत न्यूनत्तम दरों का लाभ उठाकर ठस्सा मार कर गौशाला को हड़पने वालों से मुक्ति मिलती है या नही।
कोसी प्रमंडल में है दर्जनों गौशाला: कोसी में कभी किसी बड़े नेताओं ने न तो गौ रक्षा की बात की है और न ही गौशाला के सम्पत्तियों की सुरक्षा चाही है। लिहाजा कोसी प्रमंडल के सहरसा, मधेपुरा व सुपौल जिले के एक दर्जन से अधिक गौशालाओं की सैकड़ों एकड़ जमीन अतिक्रमणकारियों की भेंट चढ रही है और जिस गौ माता की रक्षा के नाम पर देश के विभिन्न प्रांतों में बबाल मची हुई है, वह गौ माता इन सड़कों पर लावारिस हालत में चारा चरने के लिए भटकती मिल सकती है। यूं कही जा सकती है कि कोसी में गौशाला के बहाने राम नाम की लूट मची है और गौशाला अतिक्रमणकारी लोगों के आमदनी का एक आसान जरीया बना हुआ है। जबकि सूबे में गौशाला विकास पदाधिकारी भी कार्यरत हैं। आखिर ये कैसा विकास और किस तरह के विकास के लिए काम कर रही है।

कोई नहीं उठाता है आवाज: गौशाला के विकास के लिए इस क्षेत्र के विधायक से लेकर सांसद तक कभी अपना मुंह नहीं खोले हैं। जो भी मुंह खोले हैं वह भी गौशाला व गायों के हक में नहीं बल्कि सचिवों को खुश करने के लिए ही। इस करोड़ों की सार्वजनिक सम्पत्ति पर सरकार व प्रशासन किसी की नजर नहीं है। गौशाला की सम्पत्ति व आमदनी को सिर्फ कागज पर ही लूट करने का सिलसिला जारी रहा। गाय दान देने वालों की कमी नहीं है। लेकिन गाय दान दे तो कहां दें। लिहाजा लोग वैसे गायों की बिक्री कर दे रहे हैं और वह गायें मवेशी हाटों के माध्यम से तस्करी होकर बांग्लादेश चला जा रहा है।