Tuesday, October 22, 2019

शौक के पिंजड़े में कैद हो रहा तोता, आखिर कैसे होगा तोता हीरामन मुक्त

शौक के पिंजड़े में कैद हो रहा तोता, आखिर कैसे होगा तोता हीरामन मुक्त

-बाग-बगीचा एवं जंगलों से बहेलिया शिकार कर पहुंचाते हैं शौकियों के पिंजड़े तक 
-अक्सर धान के सीजन में बहेलिया प्रजनन करने वाले वयस्क तोता को -जाल में फांस कर शहर के बाजारों में घूमघूमकर खोमचा में करते बिक्री -रेड स्पोटेड तोता प्रतिबंधित ट्रेड के साथ-साथ जाल में फंसाना कानून अपराध 
-शिडयूल फोर में 7 साल की सजा एवं 10 हजार रूपए जुमाना का है प्रावधान


संजय सोनी/सहरसा 

पिंजड़े में ताेता पालने वालों की तायदाद दिन-प्रतिदिन बढते ही जा रही है और खुले आसमान और बाग-बगीचे में विचरण करने वाला तोता को पिंजड़े में कैद कर दिया जाता है। इस कारण तोता पक्षी की भी आबादी धीरे-धीरे कम होते जा रही है। जबकि तोता का प्रजननकाल माह फरवरी से अप्रैल के बीच होता है। प्रजनन के बाद से ही बहेलिया बाग-बगीचा एवं जंगलों में शिकार कर शौकियों के पिंजड़े तक पहुंचा देते हैं। तोता पक्षी को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 में शामिल नहीं किए जाने को लेकर इसके अच्छे प्रजातियों की व्यापक पैमाने पर तस्करी का भी धंधा जोरों पर चलता है। 
सड़क किनारे एवं खोमचा में खुलेआम बिकता है तोता- 
अक्सर धान के सीजन में बहेलिया प्रजनन करने वाले वयस्क तोता को जाल में फांस कर शहर के बाजारों में घूमघूमकर खोमचा में तोता बिक्री करने लगे हैं। 
वैसे सड़क किनारे से लेकर खोमचा तक तोता की बिक्री अमूमन सालों भर की जाती है। तोता बिक्री करने वाले को क्या पता की अब यह तोता पक्षी भी कुछ दिनों बाद अनजान हो जाएगी। तोता के साथ भी अन्याय होने लगी है। पहला घरेलू एवं पालतू पक्षी होने की वजह से तोता भी विलुप्ति के कगार पर जल्द हीं पहुंचने वाली है। इसका मुख्य कारण यह है की पर्यावरणविदों के नजरो में इसकी सुरक्षा की कोई चिंता नहीं रह गयी है। कोसी क्षेत्र के इलाकों में व्यापक पैमाने पर धान की खेती होती है। इस वजह से इन इलाकों में तोते की खासकर छोटे प्रजातियां खूब पायी जाती है। 
कोसी एवं नेपाल के तराई क्षेत्रों में तोता की प्रजाति- 
कोसी एवं नेपाल के तराई क्षेत्रों में मदन बेला, काग बेला,गरार, टिया, काश्मिरी, हीरामन छोटकी, हीरामन पहाड़ी, सुद्दी एवं करणा आदि अधिक पायी जाती है। इन प्रजातियों में सबसे लोकप्रिय हीरामन पहाड़ी है। इस कारण बहेलिया आसानी पूर्वक इसका शिकार कर बाज़ारों में खुलेआम बिक्री करते हैं। न कोई प्रतिबंध और न कोई कानूनी खतरा। लिहाजा धड़ल्ले से तोते की शिकार एवं बिक्री हो रही है। बेचने वालों को क्या मतलब खरीददार पाल सकेगा या नहीं। इस दिशा में वन्य एवं पक्षी प्रेमियों को ख्याल रखने की सख्त जरुरत है, अन्यथा अन्य पक्षियों की तरह तोता भी विलुप्त पक्षी की श्रेणी में आ जाएगी और हमारा समाज चर्चित गीत इक डाल पे तोता बोले और इक डाल पे मैना बोलो हैना गाते ही रह जाएंगे। 
तोते का ट्रेड एवं जाल में फंसाना प्रतिबंधित- 
देश में 5 प्रकार का तोता पाया जाता है। जिसमें कोसी के ईलाके में सर्वाधिक रूप से रेड स्पोटेड तोता पाया जाता है। इन तोता का प्रतिबंधित ट्रेड के साथ-साथ जाल में फंसाना कानून अपराध है। शिडयूल फोर 7 साल की सजा एवं 10 हजार रूपए जुमाना का प्रावधान है। वन विभाग इसके लिए टीम गठित कर तोता का ट्रेड करने और जाल में फंसाने वालों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई करेगी। 
-शशिभूषण झा, डीएफओ, सहरसा।

Saturday, March 30, 2019

अहले सुबह से मारवाड़ी समाज के घर एवं आंगन में गुंज रही ""गणगौर'' के गीत

चैत सुदी तीज को सूर्यास्त से पहले पांचों मूर्तियों को तालाब में किया जाएगा विसर्जन


नव कन्याओं के पति हंसी-खुशी नवेली दुल्हन को ससुराल ले जाएंगे विदाई 
"गोर ए गणगोर माता, खोल किवाड़ी। बाहेर उठी पुजावो सईंया, क्या फल मांगा''
सहरसा
मारवाड़ी नव कन्याओं का लोकपर्व गणगौर के गीतों से घर एवं पड़ोस का आंगन कई दिनों से सराबोर है। शहर के विभिन्न मुहल्लों में निर्वासित मारवाड़ी समाज के घर एवं आंगन में अहले सुबह से ही  गणगौर ""हरिये गोबर गीली दाबो, मोत्यां चोक पुरावो। मात्यां का दोय आखा ल्यावो निरणी गोर पुजावो।। गोर ए गणगोर माता, खोल किवाड़ी। बाहेर उठी पुजावो सईंया, क्या फल मांगा।'' गीत के बोल से गुंजायमान रहती है। गणगौर महापर्व में कुंवारी कन्यां अच्छे वर एवं नवकन्याएं ईशर, गोरा, मालन, रोवा एवं कानीराम की अराधना कर पति के दीर्घायू की कामना करती है। अंतिम दिन चैत सुदी तीज को सूर्यास्त से पहले नव कन्याएं, घर की महिलाएं, बच्चियां एवं बच्चे तालाब में पांचों मूर्तियों को विसर्जन करती है। इसके साथ ही अंतिम दिन नव कन्याओं के पति अपने ससुराल से हंसी-खुशी नवेली वधु को विदाई कर ले जाते हैं। 

कब से शुरू हुई गणगौर पूजन-
होलिका में जले बरकुला की राख एवं गाय की गोबर से 8 पिंडीय बनाकर कुंवारी व नवकन्यांए पहली चैत बदी  के दिन से गणगौर की पूजा-अर्चना शुरू करती है। इतना ही नहीं लड़कियां कुम्हार के घर जाकर मिट्‌टी लाती है और उससे भगवान शिव की प्रतिरूप ईशर, मां पार्वती के रूप गोरा, फुलवती के रूप में मालन, ईशर के बहन के रूप रोवा एवं भाई के रूप में कानीराम की मूर्ति बनाकर पूजती हैं।
गणगौर में भाई का महत्व-
गणगौर पूजा में भाई का रक्षा बंधन की तरह ही बड़ा महत्व दिया गया है। बहना भाई को भी तिलक लगाती है और भाई भी सामर्थ्य के अनुरूप बहनों को दान करती है। जिसे गौर बिन्घौरा कहा जाता है। इस परंपरा का निर्वहन मूर्ति बनाने से विसर्जन के बीच की जाती है। इस बीच गुरूवार अष्टमी को शीतला मैया की भी पूजा-अर्चना की गयी। शीतला पूजन में मारवाड़ी समाज के महिला व पुरूष सहित परिवार के सभी सदस्य मां शीतला को जल चढाकर ठंडा खाना खाए और माता को बाजरे की रोटी, राबड़ी, गुलगुल्ला आदि मिष्ठान चढाकर बसिया पर्व के रोज से ही गणगौर की मूर्ति बनाने में भी जुट गयी। 
गणगौर को पिलाती है 16 कुंआ का जल-
मूर्ति बनने के बाद लड़कियां दोपहर में गणगौर को पानी पिलाती है और गणगौर गीत भी गाती है। यह पूजा 17 से 18 दिनों की होती है। अंतिम दिन सुहागिन महिलाएं भी गणगौर को पूजती हैं। नवकन्याएं दोपहर में 16 कुंआ से जल लाकर गणगौर को पिलाती हैं। पूजा-अर्चना में सुनिधी यादुका टेकरीवाल,श्रुति यादुका टेकरीवाल, नेहा अग्रवाल, कोमल केडिया अग्रवाल, मेघा अग्रवाल गुप्ता, काजल अग्रवाल, पलक सुलतानियां, सोनी, दीपिका दहलान, प्रिया दहलान एवं सानू जगनानी इस वर्ष प्रमुख रूप से गणगौर पूज रही हैं।
गणगौर का विसर्जन समय-
तृतीया तिथि 7 अप्रैल को 4 बजे संध्या से शुरू होकर 8 अप्रैल को 4 बजकर 15 मिनट संध्या में नव कन्याओं का महापर्व गणगौर व्रत खत्म होगी। 

      






Sunday, March 17, 2019

बरियाही बाजार में होली मिलन समारोह आयोजित

बरियाही बाजार में होली मिलन समारोह आयोजित


संजय सिंह/सहरसा

जिला के कहरा प्रखंड अंतर्गत बारियाही बाजार स्थित दुर्गा मंदिर परिसर में वैश्य समाज बारियाही द्वारा होली मिलन अध्यक्ष राजू केशरी बबूल की अध्यक्षता एवं राजेश गुप्ता के संचालन में किया गया। आगत अतिथियों का स्वागत सचिव मनोज साह एवं धन्यवाद ज्ञापन उपाध्यक्ष मनोज सोनी ने किया।
वैश्य समाज बारियाही के होली मिलन समारोह का विधिवत शुभारंभ वैश्य समाज के जिलाध्यक्ष मोहन प्रसाद साह ,कार्यकारी अध्यक्ष देवेन्द्र कुमार देव , जिला प्रवक्ता राजीव रंजन साह , विजय गुप्ता , बजरंग गुप्ता , सत्यनारयाण साह , रंजीत बबलू, अमोद साह, शशि सोनी ,नवीन ठाकुर एवं नीरज राम ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस होली मिलन समारोह को संबोधित करते हुए वैश्य समाज सहरसा के जिलाध्यक्ष मोहन प्रसाद साह ने कहा होली का त्यौहार समाजिक सौहार्द का त्यौहार है। वैश्य समाज ने आज अपने इस होली मिलन समारोह में समाज के हर वर्ग के लोगों के साथ मिलकर समाज मे समरसता लाने का मिसाल कायम किया है ।

रंग और गुलला का यह त्यौहार आप सभी लिए खुशियों का त्यौहार बने यही हम और हमारी संगठन की कामना है। समारोह में पंकज गुप्ता , अमर रंजन अधिवक्ता , शिशूपाल गुप्ता , प्रदीप गुप्ता, श्याम बिहारी, पप्पू गुप्ता, राजू गुप्ता ,सुनील भगत ,गौरव केशरी ,बबूल पौदार के जिला पार्षद धीरेंद्र यादव आदि ने होली मिलन समारोह में प्रमुख रूप से मौजूद थे।

संत लक्ष्मीनाथ गोसाई की नगरी बनगांव में नशामुक्त होली मनाने की आज भी कायम है परंपरा



बनगांव में तीन दिनों तक शास्त्रीय एवं सुगम संगीत सहित नटुआ नाच से सजती है महफिल
संजय सिंह/सहरसा
एक बेरि फागुन, अाई मिलो पिया, जीवन है जग थोरी। लक्ष्मीपति पछतात राधिका, जो बिधि अंक लिखेरी। जाके कर्म घटे फागुन में, ताके बिछुड़ गये जोड़ी...होरी होय, संत लक्ष्मीनाथ गोसाई के इस चौपाई को लोग गाकर होली के रंग से सराबोर रहते हैं। मान्यता है कि मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण की लठमार होली तो बनगांव में घुमौर होली की अपनी एक अलग संस्कृति है। 18 वीं सदी के महान संत लक्ष्मीनाथ गोसाई कर्म स्थली बनगांव में भगवान श्रीकृष्ण की तरह बिना राग-द्वेष के हिन्दु एवं मुस्लिम के साथ घुमौर होली मनाना शुरू किये। होली के अवसर पर बनगांव में आज भी लोक संगीत एवं शास्त्रीय संगीत से लेकर विदेशिया शैली के संगीत व नृत्य की महफिल सजती है।

आखिर बनगांव की घुमौर होली है क्या-
18 वी सदी के महान संत लक्ष्मीनाथ गोसाई की नगरी बनगांव में सदियों से नशामुक्त होली मनाने की परंपरा आज भी कायम है। जबकि होली में नशा सेवन की आम धारणा को बनगांव की पारंपरिक होली भी एक सामाजिक उदाहरण के रूप में है। वैसे बिहार में शराब पूर्णत: प्रतिबंधित होने के बाद भी कहीं न कहीं डोलते-हिलते लोगों को देखा जा सकता है।  होली त्यौहार के रोज स्वच्छ प्रतिस्पर्धा पूर्वक बनगांव की आबादी 2 भाग में बंट जाती है।  दोनों झुंड खुले बदन संपूर्ण गांव को अलग-अलग दिशा में घूमता है। गांव घुमने वाले हुजूम को लोग जैरह कहते है। जैरह संपूर्ण गांव को घूम कर बिषहरी स्थान पहुंचती है। इस बीच जगह-जगह गांव के घरों के झरोखे से मां-बहने रंग उड़ेलती है। विषहरी स्थान में मानव महल बना कर घुमौर का हुजूम शक्ति प्रदर्शन करता है। विषहरी स्थान में रंग-गुलाल के साथ होली संपन्न हो जाती है। बढती महंगाई और खत्म हो रही संस्कृति के इस दौर में संत लक्ष्मीनाथ गोसाई की कर्म स्थली बनगांव में घुमौर होली की परंपरा को अक्षुण्ण रखने की जरुरत है। होली के दिन वास्तव में हिन्दु व मुस्लिम का भेद नहीं रहता है।   
3 दिवसीय संगीत समारोह का आयोजन- 
होली में पहले एक सप्ताह पूर्व से ही शास्त्रीय संगीत, सुगम संगीत सहित पुबाय टोल में बबुआ बाल समाज के दरवाजा पर नटुआ नाच भी हुआ करता था। जबकि ललित झा बंगला पर वाराणसी के कलाकारों के द्वारा शास्त्रीय संगीत की रसधारा बहती रही है। लेकिन अब सप्ताह दिन में सिमट कर रह गया है। इस साल गोस्वामी लक्ष्मीनाथ होली समिति बनगांव के 3 दिवसीय समारोह का बनगांव के ग्रामीण सह रेल मंत्रालय,भारत सरकार के पूर्व निदेशक एवं नेशनल फर्टीलाईजर काॅरपोरशन के पूर्व निदेशक उदय शंकर झा उद्घाटन करेंगे।
बनगांव की होली में सजती थी शास्त्रीय संगीत की महफिल-
वर्ष 1952 के दशक से बनगांव में बनारस व दरभंगा घराने के शास्त्रीय संगीत के पुराेधाओं की महफिल होली में सजती रही है। बनगांव की होली समारोह में बनारसा घराने के प्रख्यात तबला वादक पं. सामता प्रसाद मिश्र उर्फ गोदई महाराज की भी प्रस्तुति हुई है। इस समारोह में पं. रघु झा, पं. सियाराम तिवारी, रामचतुर मल्लिक, अभय नारायण मल्लिक, प्रेम कुमार मल्लिक, राजन-साजन, गिरजा देवी, श्यामानंद सिंह, जयश्रीगुप्ता,  कैलाश महाराज, मिथिलेश कुमार झा, शारदा सिंहा जैसे प्रख्यात कलाकारों की प्रस्तुति होते रही है।      
वर्ष 2019 की कैसी होगी संगीत की महफिल-
इस साल होली को सुर, ताल व लय के साथ रंगीन बनाने के लिये बनारास के कलाकारों में डा. राम शंकर, स्वाति तिवारी, अंकिता कुमारी, ऋषव चतुर्वेदी, मोहित तिवारी गायन प्रस्तुत करेंगे। जबकि प्रीति सिंह कत्थक नृत्य के साथ तबला वादकों में पंकज राज, निर्मल यदुवंशी, ऋषव त्रिपाठी एवं पुष्कर कुमार हारमोनियम पर संगत के साथ-साथ सबों का एकल वादन भी होगा और शशांक गांगुली के बांसुरी की सुरीली आवाज से शास्त्रीय संगीत की महफिल सजेगी।  
19 मार्च से ही होली का आनंद उठाएंगे बनगांववासी-
बनगांव में किसी भी पर्व व त्योहार का निर्णय धर्मसभा के घोषणा के आधार पर होती है। धर्मसभा भी लक्ष्मीनाथ गोस्वामी के काल से चलते आ रही है। इस बार धर्मसभा में पारित निर्णय अनुसार 20 मार्च को होली पर्व होगी। जबकि बनगांव को छोड़ शहर सहित अन्यत्र क्षेत्रों में 21 मार्च को होना है। गोस्वामी लक्ष्मीनाथ होली समिति बनगांव के अध्यक्ष महावीर झा, सचिव शक्तिनाथ मिश्र एवं कोषाध्यक्ष भोलन खां के अनुसार होली की पूर्व स्थानीय दुर्गा स्थान परिसर स्थित होली मंच पर 19 मार्च की रात, विषहरी स्थान होली मंच पर 20 मार्च की रात एवं प्रमुख कार्यक्रम स्थल ललित झा बंगला पर 21 मार्च को शास्त्रीय संगीत समारोह का समागम होगा।


Sunday, November 5, 2017

लैंगिक हिंसा के विरुद्ध हस्ताक्षर अभियान पकड़ा जोर




लैंगिक हिंसा के विरुद्ध हस्ताक्षर अभियान पकड़ा जोर


 

प्रभात.पटना: भूमिका विहार, एनएसएस एवं श्रो अरविंद महिला कॉलेज के संयुक्त तत्वाधान मे कनाडा एम्बेसी के सहयोग से शुक्रवार 3 नवंबर को जेंडर सेल का गठन व लैंगिक हिंसा के विरुद्ध हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत श्रो अरविंद महिला कॉलेज पटना में भी किया गया। इस अवसर पर जेंडर सेल का गठन, जेंडर आधारित नुक्कड़ नाटक का मंचन, जेंडर आधारित रैम्प वॉक व जेंडर आधारित लोक गीत भी प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में कॉलेज के जेंडर यूथ स्पीकर्स एवं 200 से अधिक छात्राओं ने भाग लेकर जागरूकता की मुहर लगा दिया।

 इस मौके पर राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित व प्रसिद्ध लेखक डॉ. शिवनारायण ने लिंग भेदभाव के नीव की आधार परिवार में ही बनती है। उन्होंने कहा कि आपके आचरण का ही नक़ल आपका संतान करता है और लिंग भेदभाव के आचरण से अपने बच्चों को आज बचने की जरुरत है। 
जबकि पदमश्री व लेखक उषा किरण खान ने कहा कि वर्तमान समय में हम समाज में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं कर सकते। यह पूर्व की कुप्रथा है जो कुछ लोग ढो रहे हैं। लैंगिक समानता हमारी सोच को दर्शाती है और ऐसा कहीं नहीं लिखा गया है कि महिलाओं के साथ हम भेदभाव करें। अब सरकार भी लगातार सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ कार्य कर रही है। दहेज प्रथा व बाल विवाह के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। लैंगिक भेदभाव भी एक सामाजिक कुरीति है जिसे हमसबों को जड़ से मिटाना ही होगा।  
श्रो अरविंद महिला कॉलेज की प्राचार्य डॉ.पूनम चौधरी ने स्वागत भाषण में अपना विचार प्रकट करते हुए कहा कि जेंडर हमारे समाज की पुरानी मानसिकता का परिचायक है जहाँ स्त्री व पुरुष के अलग-अलग भूमिका बताई जाती है। लेकिन इस कॉलेज में ऐसी सोच की कोई जगह नहीं है और हम सभी को बराबरी की नजरों से ही देखती हूँ। कॉलेज के एनएसएस अधिकारी रीता सिंह ने एनएसएस द्वारा किए जा रहे कार्यो के बारे में जानकारी दी और सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम मे आगे बढ़कर समाज मे सहयोग करने की बातें कही। कॉलेज मे लगातार पौधारोपन, रैली और खेलकुद जैसे कार्यक्रम की चर्चा करते हुए कही कि छात्राओं में शिक्षा के साथ सामाजिक जिम्मेवारी की भावना जगाना आवश्यक है और एनएसएस के कार्यक्रम इस दिशा में प्रमुख हथियार साबित हो रही है। इस मौके पर भूमिका विहार की निदेशक शिल्पी सिंह, एडवोकेसी इंचार्ज आशीष कुमार एवं माया शंकर ने भी अपने विचार प्रकट किये।


Tuesday, October 17, 2017

विश्व प्रसिद्ध संगीत कम्पनी मोक्ष म्यूजिक की अनुपम भेंट:एक प्रेमिका अपने प्रेमी की याद में गा रही है और कह रही है कि “मोरा पिया के बिना जिया लागे ना"।

दिल्ली में आयोजित की गई ‘पिया के बिना लागे न जिया’ की शानदार स्क्रीनिंग

डॉ, हरिओम उत्तर प्रदेश के वही आईएएस ऑफिसर हैं जिन्होंने उत्तर प्रदेश के तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ को गोरखपुर में अपने कार्यकाल के दौरान जेल में डाल दिया था और योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री बनते ही डॉ. हरिओम को कार्यभार से हटा दिया था। डॉ.हरिओम की जोड़ी इससे पहले भी कई गाने दे चुकी है जिनमे यारा वे, मजबूरियाँ, सोचा न था ज़िन्दगी आदि प्रमुख है...
मेघा वर्मा, दिल्ली: विश्व प्रसिद्ध संगीत कम्पनी मोक्ष म्यूजिक का मोस्ट अवैटेड गाना “पिया के बिना लागे न जिया” विश्व स्तर पर 14 अक्टूबर को भव्य अनावरण किया गया। नई दिल्ली स्थित डॉलीवुड टैलेंट क्लब में शानदार रूप से आयोजित इस रिलीज़ इवेंट शो में चर्चित आईएएस ऑफिसर डॉ. हरिओम के द्वारा गाने को गाया गया। जिसमें “पिया के बिना लागे न जिया” की शानदार स्क्रीनिंग की गयी। इस मौके पर संगीतकार राज महाजन व गायक डॉ.हरिओम के साथ गाने की मुख्य अभिनेत्री अजिता झा भी प्रमुख रूप से मौजूद थीं। इस गाने के बारे में संगीतकार राज महाजन का कहना है कि यूथ को फोकस करते हुए इस गाने को बनाया है। डॉ.हरिओम ने इस गाने को तहेदिल से गाया है। वहीँ इस बारे में गाने के सिंगर डॉ.हरिओम ने कहा कि जब मैंने प्रथम दफा गाने की डमी को सुना तो ऐसा लगा कि मेरे लिए ही बना है। सही मायने में यह बहुत ही बेहतरीन गाना है। गाने का म्युज़िक एल्बम भी बहुत शानदार है। अजिता झा इसमें काबिल-ए-गौर अभिनय की है।
अपनी अनुभव के बारे में अभिनेत्री अजिता ने कहा “वाकई में इस गाने पर काम करके बहुत ही अच्छा लगा। एक चीज़ जो मुझे बहुत भायी वह थी इसकी थीम। एक किस्म का फ्यूज़न है इस गाने में। राज महाजन सर ने बहुत ही सूदिंग ट्रैक बनाया है। राज सर को मैं थैंक्यू बोलना चाहूँगी जिन्होंने मुझे इस गाने का हिस्सा बनाया”। आपको बता दें कि इस म्युज़िक एल्बम में राज महाजन एक नए फ्लेवर में नजर आये तो वहीँ हरिओम भी इस गाने में राज के साथ स्क्रीन शेयर करते दिखे। इसके साथ ही शुभम गुप्ता, मितुल कौशिक एवं ऋषभ शर्मा ने भी अपना-अपना काम बखूबी निभाया। पहली बार विश्व प्रसिद्ध संगीत कम्पनी मोक्ष म्यूजिक ने एक साथ दो और गानों की स्क्रीनिंग की। जहाँ ‘तेरी हर अदा’ की स्क्रीनिंग की गयी तो दूसरी तरफ वहीँ अपने आने वाले गाने “सोचा न था” की एक झलक दिखाई। इस मौके पर सोचा न था का टीज़र रिलीज़ किया गया। बहुत जल्द ये गाना भी वैश्विक स्तर पर रिलीज़ किया जाएगा। तेरी हर अदा नवोदित सिंगर शुभम गुप्ता को राज महाजन की तरफ से दिया हुआ एक रिवॉर्ड है। शुभम की गायकी से अभिभूत होकर राज महाजन ने उन्हें ये मौका दिया। सोचा न था को अपनी आवाज़ से मन्दाकिनी बोरा ने सुन्दर बनाया है। डॉ, हरिओम उत्तर प्रदेश के वही आईएएस ऑफिसर हैं जिन्होंने उत्तर प्रदेश के तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ को गोरखपुर में अपने कार्यकाल के दौरान जेल में डाल दिया था और योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री बनते ही डॉ. हरिओम को कार्यभार से हटा दिया था। डॉ.हरिओम की जोड़ी इससे पहले भी कई गाने दे चुकी है जिनमे यारा वे, मजबूरियाँ, सोचा न था ज़िन्दगी आदि प्रमुख है।
मोक्ष म्यूजिक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के एडिटर चेतन चौधरी ने कहा है कि “मोरा पिया के बिना जिया लागे ना” बहुत ही प्यारा गीत है और इसे अपनी प्यारी और सुरीली आवाज में पोपुलर सिंगर व आईएएस ऑफिसर डॉ. हरिओम और सबके चहेते और जाने-माने सिंगर, एक्टर, म्यूजिक डायरेक्टर राज महाजन जी ने अपनी संगीत से जीवंतता प्रदान किया है। इस गाने को एक प्रेमिका अपने प्रेमी की याद में गा रही है और कह रही है कि “मोरा पिया के बिना जिया लागे ना"। उन्होंने यह भी कहा है कि यह गाना मेरे दिल के बहुत करीबी है। आशा है कि यह आप सबों के दिलों को भी छूएगा। "बहुत लोकप्रिय प्रेम दुख की बात है" मोरा पिया के बिना जिया लागे ना "आपकी आत्मा को स्पर्श करेंगे”।  



Tuesday, October 3, 2017

“दहेज प्रथा एवं बाल विवाह को रोकने के लिए जागरूकता अभियान

दहेज प्रथा एवं बाल विवाह को रोकने के लिए जागरूकता अभियान

मुखिया रामनाथ पांडे ने अपना उद्दगार व्यक्त करते हुए कहा कि दहेज प्रथा के कारण ही समाज मे बेटियों को जन्म से पहले ही कोख में ही खत्म कर दिया जाता है। लोग भगवान का दिया बेटियों जैसा अनमोल ऊपहार को भी लेने से इंकार कर देते हैं तो ऐसे लोगो को बुरे वक़्त मे भगवान भी मदद नहीं करता है...

कटिहार: “दहेज प्रथा एवं बाल विवाह को रोकने के लिए गाँधी जयंती के अवसर पर सामाजिक संस्था भूमिका विहार कटिहार, की ओर से रामपुर गाँव में एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर रामपुर के मुखिया रामनाथ पांडे ने अपना उद्दगार व्यक्त करते हुए कहा कि दहेज प्रथा के कारण ही समाज मे बेटियों को जन्म से पहले ही कोख में ही खत्म कर दिया जाता है। लोग भगवान का दिया बेटियों जैसा अनमोल ऊपहार को भी लेने से इंकार कर देते हैं तो ऐसे लोगो को बुरे वक़्त मे भगवान भी मदद नहीं करता है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह समाज के सम्पूर्ण विकास मे बाधक है। जब तक हम दहेज प्रथा एवं बाल विवाह जैसे बुराइयों पर विजय नहीं पाते हैं तब तक  हमारा समाज खुशहाल नहीं हो सकेगा।
भूमिका विहार के कार्यकर्ता हेमंत कुमार ने इस कार्यक्रम की अहमियतता को बताते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम के द्वारा समाज में विभिन्न समुदाय के लोगो के बीच जागरूकता लाकर ही दहेज प्रथा एवं बाल विवाह पर अंकुश लगाया जा सकता है। अभी दहेज़ प्रथा एवं बाल विवाह एक ज्वलंत मुद्दा है, जिस पर त्वरित कारवाई करना अत्यंत जरूरी है। दहेज प्रथा एवं बाल विवाह जैसे कुरीतियां कायम रही तो न जाने कितनी बेटियों को अपने प्राणों की आहुती देनी पड़ेगी। इस कुरीती से कितने परिवार की रौनक उजर चुकी है। इसके बावजूद यह समाज की ही नहीं इस देश की एक बड़ी समस्या बनी हुई है। दहेज विरोधी कई कानून बनाए जा चुके है, पर उनपर पूर्ण रूप से अमल नहीं होने से कई जगह तो इसे सामाजिक प्रतिष्ठा से जोरा जाता है कि ज्यादा दहेज दिया या लिया वह अच्छे घराने से माना जाता है। ऐसे परंपरा को हम सबों को मिलकर तोड़ना होगा और इस कुरीतियों को समाज से पहले अपने मन व सोच से बाहर निकाल फेकना होगा।
भूमिका विहार के अन्य कार्यकर्ता ने भी एक स्वर से कहा कि आज हिंसा का आसान शिकार एक लड़की को ही होना पड़ता है। चाहे वह दहेज प्रथा हो या बाल विवाह। लड़कियों को जन्म के पहले से ही हिंसा की शिकार होना पड़ता है। इस सोच का जन्म परिवार में ही हो जाता है। इसलिए जब तक एक-एक परिवार की सोच नहीं बदलेगी तब तक समाज में जागरूकता नहीं आ सकती है। इस कार्यक्रम के माध्यम से “दहेज प्रथा एवं बाल विवाह को रोकने के लिए जागरूकता संदेश” हर परिवार मे जाएगी और साथ ही हमारे समाज मे भी एक अच्छा संदेश जाएगा।